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सूर्य तथा हनुमान के दैविक स्वरूप पर विशेष लेख लिखिए।

परिचय

भारतीय धर्मशास्त्रों में सूर्य और हनुमान का अत्यंत उच्च स्थान है। एक ओर सूर्य देव प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के स्त्रोत हैं, वहीं दूसरी ओर हनुमान जी भक्ति, शक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। दोनों का दैविक स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक है। इस लेख में हम इन दोनों देवताओं के दिव्य गुणों, महत्व और उनके आपसी संबंधों पर विस्तार से विचार करेंगे।

सूर्य देव का दैविक स्वरूप

सूर्य देव की उपासना

सूर्य को अर्घ्य देना, सूर्य नमस्कार करना, रविवार का व्रत आदि प्राचीन काल से ही भारत की परंपरा में रहा है। गीता में भी श्रीकृष्ण ने कहा है कि वे ही सूर्य हैं जो सब कुछ प्रकाशित करते हैं।

हनुमान जी का दैविक स्वरूप

हनुमान और सूर्य का संबंध

हनुमान जी की सूर्यभक्ति

हनुमान जी ने सूर्य को केवल गुरु नहीं, अपितु जीवन के आदर्श रूप में स्वीकार किया। उन्होंने सूर्य के तेज, अनुशासन और नियमितता को अपने जीवन में उतारा।

दोनों के प्रतीकात्मक गुण

आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता

निष्कर्ष

सूर्य और हनुमान दोनों ही भारतीय संस्कृति के अद्वितीय प्रतीक हैं। एक जीवन देने वाला है और दूसरा जीवन को उद्देश्य देने वाला। इनका दैविक स्वरूप हमें आत्मविकास, सेवा और आध्यात्मिक ऊँचाई प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।

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