September 2025

बिहारी की कविता में चित्रित संयोग और वियोग श्रृंगार का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

प्रस्तावना बिहारी लाल हिंदी रीति काल के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं। उन्होंने ‘सतसई’ नामक काव्य रचना के माध्यम से श्रृंगार रस को अभूतपूर्व ऊँचाई प्रदान की। उनकी कविता का प्रमुख विषय श्रृंगार है, जिसमें संयोग और वियोग दोनों पक्षों का सुंदर चित्रण मिलता है। इस निबंध में हम बिहारी की कविता में संयोग […]

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तुलसी की कविता में चित्रित जीवन पक्ष का विवेचन कीजिए।

प्रस्तावना तुलसीदास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के महान कवि थे। उनका प्रमुख काव्य ‘रामचरितमानस’ भारतीय समाज, संस्कृति, धर्म और जीवन मूल्यों का दर्पण है। तुलसीदास की कविताओं में जीवन के विविध पक्षों – धार्मिक, नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक – का चित्रण हुआ है। उनका काव्य केवल भक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का

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मीरा की भक्ति में उनके जीवनानुभवों की सच्चाई और मार्मिकता है, कथन पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

प्रस्तावना मीरा बाई हिंदी भक्ति साहित्य की अद्वितीय संत-कवयित्री हैं, जिनकी रचनाओं में आध्यात्मिकता, प्रेम और आत्मनिवेदन की गहन अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी भक्ति केवल काव्य नहीं, बल्कि उनके जीवन का यथार्थ अनुभव है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों, पीड़ाओं और समर्पण को भक्ति में रूपांतरित किया। इसलिए यह कथन बिल्कुल उपयुक्त है कि

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लोकत्व से आप क्या समझते हैं? पद्मावत में वर्णित लोक्तत्वों का परिचय दीजिए।

प्रस्तावना हिंदी साहित्य में ‘लोकत्व’ शब्द का विशेष महत्त्व है। यह शब्द समाज के सामान्य जन, उनकी संस्कृति, विश्वास, परंपरा, जीवनशैली और अनुभवों की समग्र अभिव्यक्ति को दर्शाता है। लोक तत्वों का प्रभाव न केवल लोक साहित्य में बल्कि शास्त्रीय साहित्य में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मलिक मोहम्मद जायसी की ‘पद्मावत’ एक

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मध्य युग के प्रगतिशील रचनाकार के रूप में कबीर का मूल्यांकन कीजिए।

प्रस्तावना कबीर हिंदी साहित्य के भक्ति काल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। वे समाज सुधारक, संत और विचारक थे। मध्य युग में जब समाज धार्मिक आडंबर, जातिवाद और सामाजिक विषमता से ग्रस्त था, तब कबीर ने अपने दोहों और पदों के माध्यम से एक प्रगतिशील चेतना का संचार किया। इस निबंध में हम

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विद्यापति पदावली में भक्ति और श्रृंगार का द्वंद्व किस रूप में प्रकट हुआ?

प्रस्तावना विद्यापति मैथिली भाषा के महान कवि माने जाते हैं। उनकी ‘पदावली’ श्रृंगार और भक्ति रस का अद्भुत संगम है। उन्होंने अपने काव्य में राधा-कृष्ण के प्रेम को माध्यम बनाकर ईश्वर और आत्मा के बीच के संबंध को दर्शाया है। उनके काव्य में श्रृंगार की कोमलता और भक्ति की गहराई दोनों स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर

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‘पृथ्वीराज रासो’ की प्रामाणिकता–अप्रामाणिकता से जुड़े विभिन्न मुद्दों का विश्लेषण कीजिए।

प्रस्तावना ‘पृथ्वीराज रासो’ हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे चंद बरदाई ने रचा। यह ग्रंथ पृथ्वीराज चौहान के जीवन, पराक्रम और संघर्षों को छंदबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है। हालांकि, इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता को लेकर विद्वानों के बीच मतभेद हैं। कुछ इसे इतिहास का स्त्रोत मानते हैं तो कुछ इसे काव्य कल्पना का

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चंद को छंद का राजा क्यों कहा जाता है?

प्रस्तावना हिंदी साहित्य के इतिहास में ‘चंद’ का विशेष स्थान है। चंद, विशेष रूप से चंद बरदाई, को ‘छंद का राजा’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने छंदों का न केवल अद्भुत प्रयोग किया, बल्कि छंदों की विविधता, लयात्मकता और कलात्मक सौंदर्य को चरम स्तर पर पहुँचाया। उनकी रचनाओं में छंदों की स्पष्ट संरचना, भावों की

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MGSE 009 Assignment Answers 2024-25 – Gender Issues in Work, Employment and Productivity

MGSE 009 – Gender Issues in Work, Employment and ProductivityAssignment Answer Compilation (2024-25) Below are the detailed answers for each question in the MGSE 009 Tutor Marked Assignment. Click on the links to access individual posts: Do you think that work should be redefined from a Gender perspective? Justify your answers with suitable case studies

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