गीता में अवतार की संकल्पना को विस्तार से स्पष्ट कीजिए।

परिचय भगवद्गीता में ‘अवतार’ की संकल्पना एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और दार्शनिक विषय है। गीता के चौथे अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अपने अवतार के उद्देश्य और कारणों को स्पष्ट करते हैं। अवतार का अर्थ होता है – भगवान का धरती पर किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति हेतु जन्म लेना। अवतार की परिभाषा ‘अवतार’ का […]

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