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कर्म की समानभाव स्थिति पर लेख लिखिए।

परिचय भगवद्गीता में कर्म को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। गीता का मूल संदेश है – कर्म करना, लेकिन उसमें समभाव रखना। इसका अर्थ है कि हम अपने हर कार्य को निष्काम भाव से करें और उसके फल को लेकर चिंतित न हों। इस लेख में हम “कर्म की समानभाव स्थिति” का गहराई से विश्लेषण […]

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कर्मयोगी के वे लक्षण जो अर्जुन अनुसार योग्य व्यक्ति बनाते हैं, लिखिए।

परिचय भगवद्गीता में कर्मयोग एक अत्यंत महत्वपूर्ण दर्शन है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिए, उनमें कर्मयोग का विशेष स्थान है। कर्मयोग का अर्थ है – बिना फल की चिंता किए अपना कर्तव्य निभाना। गीता में ऐसा कर्मयोगी व्यक्ति महान माना गया है जो आत्मज्ञान, संतुलन और निष्काम कर्म में स्थित होता है। कर्मयोगी

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गीता में मोह के मनोविज्ञान पर प्रकाश डालिये।

परिचय भगवद्गीता में मनुष्य की आंतरिक मानसिक अवस्थाओं का गहन विश्लेषण किया गया है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिए, उनमें से एक महत्वपूर्ण विषय है ‘मोह’ – यानी लगाव, भ्रम या असत्य के प्रति आकर्षण। गीता में मोह को आत्मज्ञान प्राप्ति की राह में सबसे बड़ी बाधा माना गया है। मोह क्या है?

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गीता में धर्म एवं अधर्म पर विस्तार से लिखिए।

परिचय भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि यह एक ऐसा मार्गदर्शक है जो मनुष्य को धर्म और अधर्म के बीच का भेद समझाता है। गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन के हर मोड़ पर धर्म का पालन करने की प्रेरणा दी। धर्म और अधर्म को समझना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह जीवन के

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MBG-001: भगवद्गीता : परिचय एवं विषयप्रवेश – Assignment Answers

MBG-001 Assignment: सभी उत्तरों की लिंक नीचे MBG-001 (भगवद्गीता : परिचय एवं विषयप्रवेश) के सभी प्रश्नों के उत्तरों के लिंक दिए गए हैं। प्रत्येक उत्तर 600+ शब्दों में, सरल भाषा में लिखा गया है ताकि विद्यार्थी आसानी से समझ सकें। भगवद्गीता का विस्तृत परिचय लिखिए। गीता अध्ययन की विधियों पर लेख लिखिए। गीता की सांस्कृतिक

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गीता के शिक्षा दर्शन की विशेषताएँ लिखिए।

परिचय भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक शिक्षा दर्शन (Educational Philosophy) का भी प्रतिनिधित्व करती है। इसमें जीवन, कर्तव्य, आत्मा, धर्म, और मोक्ष के माध्यम से मनुष्य के सर्वांगीण विकास की शिक्षा दी गई है। श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश शिक्षा के उच्चतम उद्देश्य और मूल्यों को प्रकट करता

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गीता में वर्णित मुख्य विषयों पर लेख लिखिए।

परिचय भगवद्गीता भारतीय दर्शन का ऐसा अमूल्य ग्रंथ है जिसमें जीवन के सभी पहलुओं – आत्मा, धर्म, कर्म, योग और मोक्ष – की गहन चर्चा की गई है। गीता न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह एक दार्शनिक और नैतिक मार्गदर्शक भी है। इस उत्तर में हम गीता में वर्णित प्रमुख विषयों का विस्तार

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कौरव पक्ष के महानायकों का संक्षिप्त परिचय लिखिए।

परिचय महाभारत के युद्ध में कौरव पक्ष अधर्म और अहंकार का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उनके पक्ष में कोई महानायक नहीं थे। कौरव पक्ष में भी अनेक योद्धा ऐसे थे जो अद्वितीय पराक्रमी, विद्वान और नीतिवान थे। इस उत्तर में हम कौरव पक्ष के प्रमुख महानायकों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत

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पाण्डव पक्ष के महानायकों का संक्षिप्त परिचय लिखिए।

परिचय महाभारत के युद्ध में पाण्डव पक्ष धर्म, सत्य और न्याय का प्रतीक था। पाण्डवों के साथ अनेक ऐसे महानायक थे, जिन्होंने न केवल वीरता दिखाई, बल्कि अपने आदर्शों और सिद्धांतों से युद्ध को धर्मयुद्ध बना दिया। इस उत्तर में हम पाण्डव पक्ष के प्रमुख महानायकों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करेंगे। 1. अर्जुन परिचय: अर्जुन

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धर्मक्षेत्र पर टिप्पणी लिखिए।

परिचय “धर्मक्षेत्र” शब्द भगवद्गीता के पहले ही श्लोक में आता है – “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।” यह शब्द अत्यंत गूढ़ और गहराई से भरा हुआ है। इसे केवल युद्धभूमि के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धर्म और मनोविज्ञान का प्रतीक भी है। इस उत्तर में हम धर्मक्षेत्र की गहराई से

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